
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों से जुड़े VSK ऐप विवाद पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने एक शिक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती।
याचिकाकर्ता शिक्षक ने अदालत में दलील दी कि उन्हें अपने निजी मोबाइल फोन में VSK ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो उनकी निजता और व्यक्तिगत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है। उनका कहना था कि निजी उपकरण का अनिवार्य रूप से सरकारी कार्य के लिए उपयोग कराना संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है। साथ ही, ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई गई।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत फिलहाल केवल याचिकाकर्ता तक सीमित है।
यह मामला डिजिटल प्रशासन और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की बहस को नया आयाम दे रहा है। एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी पारदर्शिता और मॉनिटरिंग की आवश्यकता पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का कहना है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग स्वैच्छिक होना चाहिए, न कि बाध्यकारी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रकरण भविष्य में सरकारी कर्मचारियों के डिजिटल दायित्वों और निजता के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण न्यायिक दिशा तय कर सकता है। अगली सुनवाई में राज्य सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की दिशा स्पष्ट होगी।
फिलहाल, अदालत के इस अंतरिम आदेश को शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जबकि प्रशासनिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

